हर शब साठ हज़ार की बख़्शिश इन हिंदी | har sab sath hajar ki bakhshish in hindi. Skip to main content

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जब जिंदगी में कुछ समझ न आए तो क्या करें? इन हिंदी। Jab zindagi me kuch samaj na aaye to kya Karen? In hindi

  जब जिंदगी में कुछ समझ न आए तो क्या करें? इन हिंदी। Jab zindagi me kuch samaj na aaye to kya Karen? In hindi  🌙 जब जिंदगी में कुछ समझ न आए तो क्या करें? | अल्लाह पर भरोसा, सब्र और उम्मीद की इस्लामी सीखकभी-कभी जिंदगी में परेशानी ऐसी बढ़ जाती है कि इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी दिल परेशान रहता है। कभी किसी अपने की चिंता… कभी घर की परेशानी… कभी पैसों की फिक्र… कभी किसी दुआ के पूरा होने का इंतजार… और कभी ऐसी परेशानी जिसका हल इंसान को दूर-दूर तक नजर नहीं आता। ऐसे वक्त में दिल के अंदर एक सवाल उठता है— “आखिर अब क्या होगा?” लेकिन एक मोमिन के लिए मुश्किल वक्त का मतलब यह नहीं कि अल्लाह ने उसे अकेला छोड़ दिया है। बल्कि यही वह समय है जब इंसान को अपने रब की तरफ और ज्यादा लौटना चाहिए । 🌿 कुरआन हमें मायूस होना नहीं सिखाता अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है: “अल्लाह की रहमत से मायूस न हो।” सूरह अज़-ज़ुमर, 39:53 यह आयत उस इंसान के लिए बहुत बड़ी उम्मीद है जो अपनी जिंदगी की परेशानी से टूट चुका हो। गलतियां हो गई हों, दुआ में देर हो रही हो या हालात मुश्किल हों—अल्लाह की रहमत का दरवाजा बंद नहीं...

हर शब साठ हज़ार की बख़्शिश इन हिंदी | har sab sath hajar ki bakhshish in hindi.

 हर शब साठ हज़ार की बख़्शिश — अल्लाह की रहमत से मायूस न हों


आज हम इस ब्लॉग में जानेंगे कि हर शब साठ हज़ार की बख़्शिश कैसे होती है और — अल्लाह की रहमत से मायूस न हों के बारे में।

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू।

मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, आज हम एक ऐसे बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाले विषय पर बात करेंगे, जो हमें अल्लाह की रहमत, मग़फ़िरत और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने की याद दिलाता है।


हमारी ज़िंदगी में हमसे जाने-अनजाने बहुत सी गलतियाँ और गुनाह हो जाते हैं। कभी हमारी ज़ुबान से किसी का दिल दुख जाता है, कभी हमारी नज़र से गलती हो जाती है, कभी हम किसी का हक़ अदा नहीं कर पाते और कभी हम अल्लाह की इबादत में कोताही कर बैठते हैं।


लेकिन सबसे खूबसूरत बात यह है कि अल्लाह अपने बंदों को अपनी रहमत से मायूस होने के लिए नहीं कहता।


इंसान गुनाह करने के बाद अक्सर सोचता है—

“अब मेरी तौबा कैसे कबूल होगी?”

“मैंने बहुत गलतियाँ कर दी हैं, क्या अल्लाह मुझे माफ़ करेगा?”


याद रखिए, जब तक इंसान सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ लौटता है, तौबा का दरवाज़ा उसके लिए उम्मीद का दरवाज़ा है।


🌙 रात का समय और तौबा

रात का समय इंसान को अपने रब के करीब होने का एक खूबसूरत मौका देता है। जब दुनिया की आवाज़ें शांत हो जाती हैं और इंसान अकेला होता है, तब वह अपने अल्लाह के सामने अपने दिल की बात रख सकता है।


कुछ मिनट के लिए अपने सारे काम छोड़कर सोचिए—


आज मैंने क्या अच्छा किया?

किसी का दिल तो नहीं दुखाया?

किसी का हक़ तो नहीं मारा?

नमाज़ और इबादत में कोई कमी तो नहीं हुई?

और क्या मुझे अपने रब से माफी नहीं माँगनी चाहिए?


फिर सच्चे दिल से अस्तग़फ़िरुल्लाह कहिए और अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होकर अल्लाह से माफी माँगिए।


सिर्फ ज़ुबान से तौबा करना ही काफी नहीं, बल्कि सच्ची तौबा में इंसान अपने गुनाह को छोड़ने और दोबारा उस रास्ते पर न जाने का इरादा भी करता है। अगर किसी इंसान का हक़ मारा है तो जहाँ संभव हो, उसका हक़ वापस करना और उससे माफी माँगना भी ज़रूरी है।


❤️ अल्लाह की रहमत से मायूस क्यों हों?


हम अक्सर अपने गुनाहों को देखकर निराश हो जाते हैं, लेकिन हमें अल्लाह की रहमत को देखना चाहिए।


शैतान चाहता है कि इंसान गुनाह करने के बाद यह सोच ले कि अब उसकी कोई उम्मीद नहीं। लेकिन एक मोमिन को निराश नहीं होना चाहिए।


आज अगर हमसे गलती हुई है, तो आज ही लौट सकते हैं।


आज अगर हमारी नमाज़ में कमी हुई है, तो आज से सुधार सकते हैं।


आज अगर हमने किसी का दिल दुखाया है, तो आज ही माफी माँग सकते हैं।


और अगर हमने अल्लाह की नाफरमानी की है, तो आज ही उसके सामने हाथ उठाकर कह सकते हैं—


“या अल्लाह! मुझसे गलती हो गई। मुझे माफ़ फरमा, मुझे सही रास्ते पर चला और मुझे दोबारा गुनाह से बचा।”


🌹 आज से एक छोटी सी शुरुआत करें


हर रात सोने से पहले सिर्फ कुछ मिनट अपने लिए और अपने रब के लिए निकालिए।


अपने दिन का हिसाब कीजिए, इस्तिग़फ़ार कीजिए, दरूद शरीफ़ पढ़िए, दुआ कीजिए और दिल से तौबा कीजिए।


क्योंकि हमें नहीं मालूम कि हमारी ज़िंदगी की आखिरी रात कौन-सी होगी।


इसलिए तौबा को कल पर मत छोड़िए।


जो काम आज अल्लाह के लिए किया जा सकता है, उसे कल पर क्यों छोड़ना?


मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, असली कामयाबी सिर्फ दुनिया में ज्यादा पैसा, बड़ा घर या ऊँचा मुकाम हासिल करना नहीं है। असली कामयाबी यह है कि जब हम अपने रब के सामने जाएँ, तो हमारा रब हमसे राज़ी हो।


इसलिए हर रात अपने दिल को साफ करके सोने की कोशिश करें।


अल्लाह हमें सच्ची तौबा करने वाला, अपने गुनाहों से बचने वाला और अपनी रहमत का हक़दार बंदा बनाए।


आमीन या रब्बल आलमीन। 🤲


अगर यह बात आपके दिल को छू गई हो, तो इसे किसी एक ऐसे इंसान तक ज़रूर पहुँचाइए जिसे आज इसकी ज़रूरत हो। शायद आपकी एक छोटी सी कोशिश किसी को अल्लाह की तरफ वापस आने का ज़रिया बन जाए।


अस्सलामू अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू।🫶🏻❤️

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