जब जिंदगी में कुछ समझ न आए तो क्या करें? इन हिंदी। Jab zindagi me kuch samaj na aaye to kya Karen? In hindi 🌙 जब जिंदगी में कुछ समझ न आए तो क्या करें? | अल्लाह पर भरोसा, सब्र और उम्मीद की इस्लामी सीखकभी-कभी जिंदगी में परेशानी ऐसी बढ़ जाती है कि इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी दिल परेशान रहता है। कभी किसी अपने की चिंता… कभी घर की परेशानी… कभी पैसों की फिक्र… कभी किसी दुआ के पूरा होने का इंतजार… और कभी ऐसी परेशानी जिसका हल इंसान को दूर-दूर तक नजर नहीं आता। ऐसे वक्त में दिल के अंदर एक सवाल उठता है— “आखिर अब क्या होगा?” लेकिन एक मोमिन के लिए मुश्किल वक्त का मतलब यह नहीं कि अल्लाह ने उसे अकेला छोड़ दिया है। बल्कि यही वह समय है जब इंसान को अपने रब की तरफ और ज्यादा लौटना चाहिए । 🌿 कुरआन हमें मायूस होना नहीं सिखाता अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है: “अल्लाह की रहमत से मायूस न हो।” सूरह अज़-ज़ुमर, 39:53 यह आयत उस इंसान के लिए बहुत बड़ी उम्मीद है जो अपनी जिंदगी की परेशानी से टूट चुका हो। गलतियां हो गई हों, दुआ में देर हो रही हो या हालात मुश्किल हों—अल्लाह की रहमत का दरवाजा बंद नहीं...
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली, नात लिरिक्स इन हिंदी।
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली, नात लिरिक्स इन हिंदी।
Poet: Zeeshan Abidi:
Composition: Saiyad Raza Abbas Zaidi
दिल को छू जाने वाली नात शरीफ है ये । अपनी मुश्किल में मौला अली मुश्किल कुशा को याद करते हुवे और दिल से मेहसूस करते हुवे इस नात को जरूर पढ़े। जिसके अल्फाज हैं, "मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली" ।
ऐ कुल के मददगार सरदारों के सरदार,
मुश्किल कुशा हो मेरे मौला मेरे सरकार।
गर तुम ना करोगे तो करम कौन करेगा,
गर तुम ना सुनोगे तो मेरी कौन सुनेगा।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
मौला मेरी निगाहों को हासिल हो ये सरफ,
जीते जी एक बार दिखा दो मुझे नजफ,
सांसों का रुक न जाए कहीं सिलसिला अली।
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
मुश्किल घड़ी है कीजिए आसान रास्ते,
सब पर करम हो बाली सकीना के वास्ते।
तुम बिन नहीं है कोई मेरा आशरा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
अय किबरिया की शान मोहम्मद के दिल नशीन,
आंसू रवां है आंख से दिल को सुकून नहीं।
ये दिल से आ रही है मुसलशल सदा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
एक घर मुझे भी चाहिए काबे के मोहतरम,
जिस पर लगा हो हजरत - ए - अब्बास का अलम।
गुरबत में मुफलिसी में यही है दुआ अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
बीमार ए करबला से वफ़ा का सिला मिले,
बीमार जो हैं उनको मुक्कमल शिफा मिले।
उस की कसम जो कांटों पे चलता रहा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
हाय ए हुसैन हाये जइफी का वो समां,
देखी जवान बेटे के सीने में जब सीना।
रख कर सीना पे हाथ तड़प कर कहां अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जिस दम असीर होके चलें शाम की तरफ,
जैनब पुकारें देख के हाय सोए नजफ़।
किस तरह साम जाऊंगी में बे रिदा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
ज़िंदान में जब बहन का जनाजा न उठ सका,
हाए तड़प के सैयद ए सज्जाद ने कहां।
वक्त ए मदद हैं आइए या मुर्तजा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जिशान और रजा के लबों पर दुआ है ये,
गैबत से जल्द बारहवे बेटे को भेजिये।
मुश्किल है सांस लेना अब उनके बिना अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
गर तुम ना करोगे तो करम कौन करेगा,
गर तुम ना सुनोगे तो मेरी कौन सुनेगा।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।

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