इस्लामी बहनों की नमाज़ " इन हिंदी | Islami Bahno Ki Namaz in hindi | इस ब्लॉग में हम जानेंगे इस्लामी बहनों की नमाज़" इन हिंदी | इस्लामी बहनों की नमाज़ हर मुस्लिम बहन के लिए अल्लाह तआला की सबसे अहम इबादतों में से एक है। सही तरीके से नमाज़ अदा करना, उसके फ़र्ज़, वाजिब, सुन्नत और शर्तों को जानना हर मोमिन बहन की ज़िम्मेदारी है। बहुत-सी इस्लामी बहनें नमाज़ पढ़ती तो हैं, लेकिन उन्हें नमाज़ के सही तरीके और ज़रूरी मसाइल की पूरी जानकारी नहीं होती। इस लेख में हम इस्लामी बहनों की नमाज़ का मुकम्मल तरीका आसान और सरल हिंदी भाषा में बताएँगे। साथ ही नमाज़ की शर्तें, फ़र्ज़, सुन्नत, पर्दे से जुड़े अहम मसाइल और आम गलतियों का भी ज़िक्र करेंगे, ताकि हर इस्लामी बहन अपनी नमाज़ को सही तरीके से अदा कर सके और अल्लाह तआला की रज़ा हासिल कर सके। आइए, इस्लामी बहनों की नमाज़ के सही और सुन्नत के मुताबिक़ तरीके को विस्तार से समझते हैं। 🩵🩵🩵🩵🩵 दावते इस्लामी की किताब "इस्लामी बहनों की नमाज़" के मुताबिक नमाज़ की 6 शर्तें (नमाज़ के शराइत) नीचे दी गई हैं, जिनके बिना नमाज़ शुरू ही नही...
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली, नात लिरिक्स इन हिंदी।
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली, नात लिरिक्स इन हिंदी।
Poet: Zeeshan Abidi:
Composition: Saiyad Raza Abbas Zaidi
दिल को छू जाने वाली नात शरीफ है ये । अपनी मुश्किल में मौला अली मुश्किल कुशा को याद करते हुवे और दिल से मेहसूस करते हुवे इस नात को जरूर पढ़े। जिसके अल्फाज हैं, "मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली" ।
ऐ कुल के मददगार सरदारों के सरदार,
मुश्किल कुशा हो मेरे मौला मेरे सरकार।
गर तुम ना करोगे तो करम कौन करेगा,
गर तुम ना सुनोगे तो मेरी कौन सुनेगा।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
मौला मेरी निगाहों को हासिल हो ये सरफ,
जीते जी एक बार दिखा दो मुझे नजफ,
सांसों का रुक न जाए कहीं सिलसिला अली।
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
मुश्किल घड़ी है कीजिए आसान रास्ते,
सब पर करम हो बाली सकीना के वास्ते।
तुम बिन नहीं है कोई मेरा आशरा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
अय किबरिया की शान मोहम्मद के दिल नशीन,
आंसू रवां है आंख से दिल को सुकून नहीं।
ये दिल से आ रही है मुसलशल सदा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
एक घर मुझे भी चाहिए काबे के मोहतरम,
जिस पर लगा हो हजरत - ए - अब्बास का अलम।
गुरबत में मुफलिसी में यही है दुआ अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
बीमार ए करबला से वफ़ा का सिला मिले,
बीमार जो हैं उनको मुक्कमल शिफा मिले।
उस की कसम जो कांटों पे चलता रहा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
हाय ए हुसैन हाये जइफी का वो समां,
देखी जवान बेटे के सीने में जब सीना।
रख कर सीना पे हाथ तड़प कर कहां अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जिस दम असीर होके चलें शाम की तरफ,
जैनब पुकारें देख के हाय सोए नजफ़।
किस तरह साम जाऊंगी में बे रिदा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
ज़िंदान में जब बहन का जनाजा न उठ सका,
हाए तड़प के सैयद ए सज्जाद ने कहां।
वक्त ए मदद हैं आइए या मुर्तजा अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जिशान और रजा के लबों पर दुआ है ये,
गैबत से जल्द बारहवे बेटे को भेजिये।
मुश्किल है सांस लेना अब उनके बिना अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।
गर तुम ना करोगे तो करम कौन करेगा,
गर तुम ना सुनोगे तो मेरी कौन सुनेगा।
जहरा की मुसीबत का तुम्हे वास्ता अली,
मुश्किल को मेरी हल करो मुश्किल कुशा अली।

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