इस्लाम में औरत का मक़ाम इस्लाम एक मुकम्मल दीन है जो ज़िंदगी के हर पहलू में इंसाफ़, रहमत और बराबरी की तालीम देता है। इस्लाम में औरत को बहुत ऊँचा मक़ाम दिया गया है, लेकिन अफ़सोस कि अक्सर इस्लाम की तालीमात को ग़लत समझा जाता है या सांस्कृतिक रवायतों के साथ मिला कर पेश किया जाता है। इस ब्लॉग में हम क़ुरआन और हदीस की रोशनी में इस्लाम में औरत के असल मक़ाम को समझने की कोशिश करेंगे। इस्लाम से पहले औरत की हालत इस्लाम के ज़ुहूर से पहले अरब समाज में औरत की हालत बेहद खराब थी। उसे न विरासत का हक़ था, न इज़्ज़त का। कहीं-कहीं तो बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर दिया जाता था। ऐसे माहौल में इस्लाम ने औरत को न सिर्फ़ इंसान माना बल्कि उसे मुकम्मल हक़ात दिए। क़ुरआन की नज़र में औरत क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और हमने बनी आदम को इज़्ज़त बख़्शी" (सूरह अल-इसरा: 70) यह आयत साफ़ बताती है कि मर्द और औरत दोनों बराबर इज़्ज़त के हक़दार हैं। क़ुरआन में औरत को माँ, बेटी, बहन और बीवी हर हैसियत से रहमत बताया गया है। माँ के रूप में औरत इस्लाम में माँ का मक़ाम सबसे बुलंद है। हदीस में आता है कि एक...
Best Naat Lyrics in hindi/Mera Jina Mera Marna Ilahi Teri Khatir Ho/मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो
Best Naat Lyrics in hindi/Mera Jina Mera Marna Ilahi Teri Khatir Ho/मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो
बोहोत ही बेहतरीन कलाम इन हिंदी Best Naat Lyrics In Hindi/Mera Jina Mera Marna Ilahi Teri Khatir Ho/मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो जिसमे दुआ के साथ साथ दिल के असली जज़्बात भी बयान हुवे है।जिसमे बयान किया गया है की बंदा हर हाल में अपने इलाही की खातिर जीना, चलना, उठना, बैठना, रोना, हंसना, हर हाजात को पूरा करना सिर्फ इलाही यानी की अल्लाह अजवजल्लाह की खातिर है ये बता रहा हैं। इसे जरूर पढ़े अपने दिल के जज़्बात के साथ। यकीनन सुकून भी मिलेगा और दिन ए इस्लाम से मोहब्बत भी बढ़ेगी।
Best Naat Lyrics in hindi/Mera Jina Mera Marna Ilahi Teri Khatir Ho/मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो 👇
मेरा रुकना मेरा चलना इलाही तेरी खातिर हो।
मसाजिद में मजालिस में तू ही तू हो मेरे दिल में।
मेरा रोना मेरा हंसना इलाही तेरे खातिर हो ।
मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो।
मेरा रुकना मेरा चलना इलाही तेरी खातिर हो।
मेरा रुकना मेरा चलना इलाही तेरी खातिर हो।
जमाना ढल रहा है मगरिबी तहजीब में लेकिन ।
मेरा हर रंग में ढलना इलाही तेरे खातिर हो।
तेरी मनसा मेरी मंजिल ये दिल एक पल ना हो गाफिल।
सरे मैदान मेरा गिरना इलाही तेरे खातिर हो।
मेरा हाजत रवा तू है मेरा मुश्किल कुशा तू है।
जफा करना वफा करना इलाही तेरे खातिर हो।
मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो।
मेरा रुकना मेरा चलना इलाही तेरी खातिर हो।
तेरी चाहत की दावत में शरे बाजार यूं फिर ना ।
मेरा गोसां नसी रहना इलाही तेरी खातिर हो ।
वफा की राह में चलते हुए दीवाने हुद -हुद का ।
गुबारे राह को मलना इलाही तेरी खातिर हो ।
मेरा जीना मेरा मरना इलाही तेरी खातिर हो।
मेरा रुकना मेरा चलना इलाही तेरी खातिर हो।
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