इस्लाम में औरत का मक़ाम इस्लाम एक मुकम्मल दीन है जो ज़िंदगी के हर पहलू में इंसाफ़, रहमत और बराबरी की तालीम देता है। इस्लाम में औरत को बहुत ऊँचा मक़ाम दिया गया है, लेकिन अफ़सोस कि अक्सर इस्लाम की तालीमात को ग़लत समझा जाता है या सांस्कृतिक रवायतों के साथ मिला कर पेश किया जाता है। इस ब्लॉग में हम क़ुरआन और हदीस की रोशनी में इस्लाम में औरत के असल मक़ाम को समझने की कोशिश करेंगे। इस्लाम से पहले औरत की हालत इस्लाम के ज़ुहूर से पहले अरब समाज में औरत की हालत बेहद खराब थी। उसे न विरासत का हक़ था, न इज़्ज़त का। कहीं-कहीं तो बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर दिया जाता था। ऐसे माहौल में इस्लाम ने औरत को न सिर्फ़ इंसान माना बल्कि उसे मुकम्मल हक़ात दिए। क़ुरआन की नज़र में औरत क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और हमने बनी आदम को इज़्ज़त बख़्शी" (सूरह अल-इसरा: 70) यह आयत साफ़ बताती है कि मर्द और औरत दोनों बराबर इज़्ज़त के हक़दार हैं। क़ुरआन में औरत को माँ, बेटी, बहन और बीवी हर हैसियत से रहमत बताया गया है। माँ के रूप में औरत इस्लाम में माँ का मक़ाम सबसे बुलंद है। हदीस में आता है कि एक...
नात लिरिक्स इन हिंदी/सूपर हीट कलाम/भर दो जोली/हाफिज ताहिर कादरी/naat lyrics in hindi
नात लिरिक्स इन हिंदी/सूपर हीट कलाम/भर दो जोली/हाफिज ताहिर कादरी/naat lyrics in hindi
नात ख्वान: हाफिज ताहिर कादरी
कलाम : भर दो जोली
नात लिरिक्स इन हिंदी।
नात शरीफ कलाम इन हिंदी लिरिक्स
बेकस पे करम कीजिये सरकारें मदीना,
बेकस पे करम कीजिये सरकारें मदीना,
गरदीश में हैं तकदीर भवर में है सफ़ीना,
बेकस पे करम कीजिये सरकारें मदीना।
तुम्हारे आस्तानें से जमाना क्या नहीं पाता,
तुम्हारे आस्तानें से जमाना क्या नहीं पाता,
कोई भी दर से खाली मांगने वाला नहीं जाता,
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
भर दो जोली सल्ललाह,,,
भर दो जोली मेरे आका,,,
तेरा मंगता तेरे दर पर बनकर सुवाली आया हैं,
करदो अता हसनैन का सदका खाली जोली लाया हैं।
कुछ नवासों का सदका अता हो,
दर पर आया हूं बनकर सुवाली।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
तुम ज़मानें के मुख्तार हो या नबी,
बेकशों के मददगार हो या नबी,
सबकी सुनते हो अपने हों या गैर हों।
तुम गरीबों के गम ख्वार हो या नबी।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
आका मेरे आका मेरे करदो करम सरकार।
आका करदो करम सरकार।
हम हैं रंजो मुसीबत के मारे हुवे,
सख्त मुस्किल हैं गम से हैं हारे हुवे,
या नबी कुछ खुदारा हमें भीख दो,
दर पे आए हैं दामन पशारे हुवे।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
जो इब्ने मुर्तजा ने किया काम खूब हैं,
कुरबानि ए हुसैन का अंजाम खूब हैं,
कुर्बान होके फातमा जेहरा के चैन ने,
दिन ए खुदा की शान बढ़ाई हुसैन ने,
बक्सी है जिसने मजहबे इस्लाम को हया,
कितनी अजीम हजरते शब्बीर की हैं जात,
मैदान ए करबला में शहे खुशखीशाल ने,
सजदे में सर कटाके मुहम्मद के लाल ने,
जिंदगी बक्शदी बंदगी को,
आबरू दिन ए हक की बचाली,
वो मुहम्मद का प्यारा नवासा,
मेरे आका का प्यारा नवासा,
जिसने सजदे में गरदन कटाली।
जिसने सजदे में गरदन कटाली।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
आशिके मुस्तफा की अजान में,
अल्लाह अल्लाह कितना असर था,
हां अल्लाह अल्लाह कितना असर था,
अर्श वाले भी सुनते थे जिसको,
क्या अजान थी अजाने बिलाली।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
आका मेरे मौला मेरे,
दिलबर मेरे, रहबर मेरे,
आका मेरे मौला मेरे,
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
हैं मुखालिफ जमाना किधर जाएं हम,
हालात ए बेकशी किसको दिखलाएं हम,
हम तुम्हारे भिखारी हैं या मुस्तफा,
किसके आगे भला हाथ फैलाएं हम।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
हश्र में उनको देखेंगे जिस दम,
उम्मती ये कहेंगे खुशीसे,
आ रहें है वो देखो मोहम्मद,
जिनकी हैं शान सबसे निराली।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
आका मेरे आका मेरे करदो करम सरकार।
आका करदो करम सरकार।
हां, काश पुरनम दयारे नबी में,
जीते जी हो बुलावा किसी दिन,
जीते जी हो बुलावा किसी दिन,
हाल ए दिल मुस्तफा को सुनाऊं,
हाल ए दिल मुस्तफा को सुनाऊं,
थाम कर उनके रोजे की जाली।
थाम कर उनके रोजे की जाली।
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
भर दो जोली मेरी जाने आलम,🤲
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली।
सोन्या......... मदीने वालें आका..............🤲😌
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