New Muharram Kalam 2023- Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है–मनकबत–हाफिज ताहिर कादरी–नात लिरिक्स इन हिंदी Skip to main content

S.A.KHALIFA

Islam me aurat ka Makam in hindi | इस्लाम में औरत का मक़ाम इन हिंदी |

इस्लाम में औरत का मक़ाम इस्लाम एक मुकम्मल दीन है जो ज़िंदगी के हर पहलू में इंसाफ़, रहमत और बराबरी की तालीम देता है। इस्लाम में औरत को बहुत ऊँचा मक़ाम दिया गया है, लेकिन अफ़सोस कि अक्सर इस्लाम की तालीमात को ग़लत समझा जाता है या सांस्कृतिक रवायतों के साथ मिला कर पेश किया जाता है। इस ब्लॉग में हम क़ुरआन और हदीस की रोशनी में इस्लाम में औरत के असल मक़ाम को समझने की कोशिश करेंगे। इस्लाम से पहले औरत की हालत इस्लाम के ज़ुहूर से पहले अरब समाज में औरत की हालत बेहद खराब थी। उसे न विरासत का हक़ था, न इज़्ज़त का। कहीं-कहीं तो बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर दिया जाता था। ऐसे माहौल में इस्लाम ने औरत को न सिर्फ़ इंसान माना बल्कि उसे मुकम्मल हक़ात दिए। क़ुरआन की नज़र में औरत क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और हमने बनी आदम को इज़्ज़त बख़्शी" (सूरह अल-इसरा: 70) यह आयत साफ़ बताती है कि मर्द और औरत दोनों बराबर इज़्ज़त के हक़दार हैं। क़ुरआन में औरत को माँ, बेटी, बहन और बीवी हर हैसियत से रहमत बताया गया है। माँ के रूप में औरत इस्लाम में माँ का मक़ाम सबसे बुलंद है। हदीस में आता है कि एक...

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New Muharram Kalam 2023- Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है–मनकबत–हाफिज ताहिर कादरी–नात लिरिक्स इन हिंदी

बोहोत ही खूबसूरत न्यू कलाम बाय हाफिज ताहिर कादरी New Muharram Kalam 2023- Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है–मनकबत–हाफिज ताहिर कादरी–नात लिरिक्स इन हिंदी में लिखी हुवि यहां आपको इस ब्लॉग पोस्ट में मील जायेगी। और इसके साथ इस Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है कलाम की नात पढ़ी हुवी लिंक भी नीचे डाली हुवी है आप डायरेक्ट इसे भी सुन सकते हैं। ये कलाम अभी हाल ही में लॉन्च हुवा है हाफिज ताहिर कादरी के यू ट्यूब चैनल पर और इस कलाम को बोहोत ही पसंद किया जा रहा हैं। और आप भी इस कलाम को एक बार सुनेंगे तो बार बार सुनने का दिल चाहेगा।। बोहोत ही पयारा कलाम है ये और उतने ही प्यारे अंदाज में हाफिज ताहिर कादरी ने इस मनकबत को पढ़ा हैं। वैसे तो हाफिज ताहिर कादरी की सभी नात की पेशकश बोहोत है शानदार और अलग तरीके से ही होती है जिस से उनके चाहने वाले हाफिज ताहिर कादरी की हर एक नात को बोहोत ही पसंद करते हैं। उनमेसे हो एक और नात ये Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है भी हैं।। 


क्योंकि अभी मोहरम के दिन चल रहे है इसलिए भी इस कलाम को बार बार सुनकर इमाम हुसैन के लिए अपनी मोहब्बत का इजहार इस कलाम के जरिए किया जा रहा है। इस कलाम को सुनकर दिल को बेहद ही सुकून मिलता है और बार बार सुनने को दिल चाहता हैं क्योंकि इमाम हुसैन की मोहब्बत जो दिल में है वो बयान कर पाना मुश्किल है हर उस बन्दे के लिए जो करबला के वाकिए को जानता है और महसूस करता है की हम किस आका के बंदे है जिनका नवासा ऐसा है जिसका नाम सुनते ही दिल से आवाज आती है की मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है–😌👑मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,। तो इस बेहतरीन कलाम के हिंदी लिरिक्स को आप भी पढ़े और दूसरों तक भी जरूर शेयर करे ताकि हुसैन के हर चाहने वाले तक ये कलाम पहुंच सके।

New Muharram Kalam 2023- Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है–मनकबत–हाफिज ताहिर कादरी–नात लिरिक्स इन हिंदी👇

हुसैन,,,, हुसैन,,,,,हुसैन,,,,,हुसैन,,,,,हुसैन


हुसैन मौला हुसैन,,,,, हुसैन मौला हुसैन,,,,,
हुसैन मौला हुसैन,,,,,हुसैन मौला हुसैन,,,,,


वो हैदरे कर्रार की है जिसमे सुजाअत,,,
वो जिसकी शहादत पे है कुरबान शहादत,,,
वो हैदरे कर्रार की है जिसमे सुजाअत,,,
वो जिसकी शहादत पे है कुरबान शहादत,,,
वो जिसकी हुवी नेजे पे कुरआन की तिलावत,,,

मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।


मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।


तोहिब्बुल हुसैन,,,,तोहिब्बुल हुसैन,,,,
तोहिब्बुल हुसैन,,,,तोहिब्बुल हुसैन,,,,


वो जिसके मुक़ाबिल न टीका कोई यजीदी,,,
वो जिसने कमर तोड़के रखदी हैं सितम की,,,
वो जिससे है दुनिया ए सितम आज भी सहमी,,,

मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।


हुसैन मौला हुसैन,,,,, हुसैन मौला हुसैन,,,,,
हुसैन मौला हुसैन,,,,,हुसैन मौला हुसैन,,,,,


सुलताने करबला को हमारा सलाम हों,,,,

जानाने मुस्तफा को हमारा सलाम हो,,,,

अब्बास नामदार हैं ज़ख्मों से चूर चूर,,,,

उस पैकरे रिजा को हमारा सलाम हों,,,,

अकबर से नौजवान भी रन हुवे शहीद,,,,

हमसिकले मुस्तफा को हमारा सलाम हों,,,,

भाई भतीजे भानजे सब हो गए शहिद,,,,

हर लाल ए बे बहां को हमारा सलाम हों,,,

अशगर सी नन्ही जान पर दिल से फिदा हूं मैं,,,

मजलूम बेखता को हमारा सलाम हों,,,,

नासिर बिला ए शाह में कहता हैं बार बार,,,,

मेहमाने करबला को हमारा सलाम हों,,,,।

अस्सलाम या हुसैन,,,,अस्सलाम या हुसैन,,,,
अस्सलाम या हुसैन,,,,अस्सलाम या हुसैन,,,,


वो जिसके लिए तुल किया शाह ने सजदा,,,
वो जिसके लिए खुत्बे को सरकार ने रोका,,,,
वो जिसने शहे दी से किया वादा निभाया,,,,

मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।


अल्लाह ने शहीदों का जिसे शाह बनाया,,,
कांधो पे जिसे सारे मदीना ने बिठाया,,,,
वो जिसने खुदा के लिए सर अपना कटाया,,,,
वो जिनके लिए अपना वतन जिसने है छोड़ा,,,,
जो गुलशने इस्लाम को हैं फूल से सींचा,,,,
तलवार के साए में किया जिसने है सजदा,,,,


शाह अस्त हुसैन,,, बादशाह अस्त हुसैन,,,,
दीं अस्त हुसैन,,,, दी पनाह अस्त हुसैन,,,,


मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।


तोहिब्बुल हुसैन,,,,तोहिब्बुल हुसैन,,,,
तोहिब्बुल हुसैन,,,,तोहिब्बुल हुसैन,,,,


वो सरवरे कौनैन का जो नूरे नजर हैं,,,,
वो हैदरे कर्रार का जो लखते जिगर हैं,,,,
वो बिनते नबी जोहरा का जो प्यारा पीसर हैं,,,
वो हैदरे कर्रार की है जिसमे सुजाअत,,,
वो जिसकी शहादत पे है कुरबान शहादत,,,
वो हैदरे कर्रार की है जिसमे सुजाअत,,,
वो जिसकी शहादत पे है कुरबान शहादत,,,
वो जिसकी हुवी नेजे पे कुरआन की तिलावत,,,


मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।

वो जिसकी मोहब्बत है शहे दीं की मोहब्बत,,,
वो जिसकी अदावत है शहे दीं की अदावत,,,
वो जिसकी इनायत हैं शहे दीं की इनायत,,,,
हैं सिर्फ हजी जिसका जमाने में है चर्चा,,,
वो जिसका वली गौस कुतुब पढ़ते है खुतबा,,,,
वो जिसके दर ए पाक पे वलियों का हैं मेला,,,,


मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद हैं,,,,,
उनका जो वफादार हैं वो भी पसंद हैं,,,,,।


हुसैन मौला हुसैन,,,,, हुसैन मौला हुसैन,,,,,
हुसैन मौला हुसैन,,,,,हुसैन मौला हुसैन,,,,,



New Muharram Kalam 2023- Mujko Hussain e Paak Bara Hi Pasand Hai-Mankabat-Hafiz Tahir Qadri-Naat Lyrics In Hindi/मुझको हुसैन ए पाक बढ़ा ही पसंद है–मनकबत–हाफिज ताहिर कादरी–नात लिरिक्स इन हिंदी👇by Hafiz Tahir kadri👇😌👑❤️





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